झारखंड के प्रमुख पर्व एवं त्यौहार |

झारखंड के प्रमुख पर्व एवं त्यौहार | Parv | Bharat Parv

पर्व एवं त्योहारकिस माह में मनाया जाता है दिनमहत्वपूर्ण तथ्य
फगुआफागुन ( March )  से  चैत्र माहपूर्णिमा पूर्णिमा के दिन अखरा में सेमल की डाली गाड़ कर उसके आसपास  पुआल और लकड़ियों का ढेर बना दिया जाता है तथा रात को उसमें आग लगा दी जाती है
सरहुलवैशाख महीना का अंतिम दिनसरहुल को मुंडा जनजाति में ( बा ), उरांव जनजाति में ( खददी ), खड़िया जनजाति इसे ( जकारे सोहराय ) कहती है
मंडा पर्वअक्षय तृतीयाइसकी शुरुआत छाऊ नृत्य से होती है
उल्टा लटकाने की क्रिया को ध्रुवंशी कहते हैं
कदलेटाभाद्रपद माह इस पर्व में वृक्ष की पूजा की जाती है तथा इसके मानने से फसल में कोई रोग नहीं लगता
करम पूजाभाई-बहन के प्रेम को प्रदर्शित करने वाला त्यौहार हैइस पूजा में माता बन चुकी बहने भाग नहीं लेती हैं इस पूजा में विभिन्न अनाज का प्रयोग होता है जैसे जो, गेहूं, मकई, उड़द, कुर्थी, चना तथा मटर
सोहराई कार्तिक अमावस्या मवेशियों की पूजा और सम्मान के लिए सोहराय पर्व मनाया जाता है
किस पर्व में सभी पशुओं की दौड़ शामिल है
देव उठानआषाढ़ माहकार्तिक  चतुर्दशीदेवों को जगाने के लिए कार्तिक चतुर्दशी को देव उठान मनाया जाता है
पुरुष पितरों की पूजा करके देव बिठाकर उनकी पूजा आदि करते हैं 
जनी शिकारयह पर्व पूरी तरह जनजातीय स्त्रियों के साहस और शक्ति प्रदर्शन पर आधारित है
 यह पर 12 वर्ष के अंतराल पर मनाया जाता है 
सावन पूजाशुक्लपक्ष सप्तमीबकरे की बलि दी जाती है जिसे सामूहिक चंदे से खरीदा जाता है 
बहुराभादोकृष्णपक्ष चतुर्थीसंतान प्राप्ति के लिए यह पर्व स्त्रियां मनाती है
 इसे  ( राइज बहरलक ) भी कहा जाता है
भलवा फारेख ( भाख  कॉटेक )यह पर्व कदलेटा के दो-तीन दिन बाद मनाया जाता है 
चांद बारेकभादोकृष्ण पक्षइस पर्व को बड़ी-बूढ़ी महिलाएं दो दिन चांद ना देखने का व्रत घर में रखती हैं
नवाखानीयह पर्व करम पूजा के बाद मनाया जाता हैपर्व नए अनाज से संबंधित है
सुरजाही पूजाअगहन मासइस पूजा में केवल पुरुष ही भाग लेते हैं
देशउलीयह पूजा 12 वर्षों में एक बार की जाती है
 इस पूजा में भैंस की बलि दी जाती है
पाटो सरनावैशाख माहयह खड़िया समाज का प्रमुख त्यौहार है  क्या कर रही हैइस त्यौहार में भैंसा भेड़ा तथा 5 मुर्गों की बलि दी जाती है
सरना पूजाया पर्व खड़िया जनजाति के द्वारा मनाया जाता है 
जाडकोर  पूजायह खड़िया जनजाति का एक प्रमुख त्यौहार हैयह पर्व मानव तथा पालतू पशुओं की रक्षा के लिए मनाई जाती है 
  कुटी दहन पूजायह पर्व बीमारी से बचने तथा आकाशीय बिजली से बचने के लिए मनाई जाती है 
धान बूनी  धान को खेत में ले जाकर बुना जाता है
रोग खेदनायह रोग बहिष्कृत करने का एक छोटा पर्व है
जितियाआश्विन मासकृष्ण पक्ष अष्टमीमाताएं अपने पुत्र की सुख समृद्धि के लिए जितिया करती हैं
अगहनी पूजाअगहन पुआल खलिहान  से इसी  के बाद उठाया जाता है
 भाई भीखबहने अपने भाई भाभियों के घर से भिक्षा मांग कर आनाज लाती हैं और निश्चित दिन निमंत्रण दे आती हैं
यह त्यौहार 12 वर्षों में एक बार मनाया जाता है
सारो पूजाइस पूजा के दिन  भैंस की बलि दी जाती है
यह पूजा खड़िया तथा उरांव जनजाति के मध्य  भाईचारे का प्रतीक है
लमलमना  पर्वयह जाडकोर पूजा के दूसरे दिन मनाया जाता है
करम फागुन पूजा खड़िया जनजाति इस त्यौहार को बनाती है
चुआ डाडी कुआं पूजाखड़िया जनजाति ढाकाई रानी और  सेमभू राजा की पूजा इस अवसर पर करते हैं
खेत पूजाखड़िया समाज में ध्यान पकाने पर किसान कालो से या पूजा करवाता है
माघ बोंगा पूजायह पूजा संथाल जनजाति में प्रचलित है जिनमें स्त्रियां दाहार नृत्य करती हैं
मुचरी बोंगा पूजा यह पूजा संथाल जनजाति में प्रचलित है तथा इस अवसर पर लांगड़े गीत नृत्य किया जाता है
जुगनी बोंगा पूजा किस पर्व के अवसर पर लांगड़े नृत्य किया जाता है परंतु स्त्रियों को प्रसाद नहीं दिया जाता है
दासाई दाड़ानयह पर्व संस्थानों तथा मात्र पुरुषों के द्वारा मनाया जाता है

झारखंड

झारखंड के प्रमुख पर्व एवं त्यौहार, पर्व त्यौहार, सामाजिक एकता के लिए किसी भी क्षेत्र में स्थानीय पर्वों का होना आवश्यक है इसलिए जनजातीय त्यौहार अपना अस्तित्व अभी तक बचा सके हैं

परंतु पशु संरक्षण अधिनियम के तहत बलि प्रथा पर लोगों को जागरूक होना चाहिए 

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